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MYTH AND FACT OF VIT D
Introduction | परिचय
Vitamin D is known as the “Sunshine Vitamin” because our body produces it when exposed to sunlight. It plays a crucial role in maintaining healthy bones, muscles, immunity, and overall health. However, many misconceptions exist regarding Vitamin D.
विटामिन D को “सनशाइन विटामिन” कहा जाता है क्योंकि शरीर सूर्य की रोशनी से इसे बनाता है। यह हड्डियों, मांसपेशियों, रोग प्रतिरोधक क्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके बारे में कई गलत धारणाएं प्रचलित हैं।
Myth 1: If You Get Sunlight Daily, You Cannot Have Vitamin D Deficiency
Fact:
Even people who spend time outdoors can develop Vitamin D deficiency due to pollution, sunscreen use, dark skin, aging, inadequate exposure time, or limited skin exposure.
मिथक 1: रोज धूप में रहने वालों को विटामिन D की कमी नहीं होती।
तथ्य:
धूप में रहने के बावजूद प्रदूषण, सनस्क्रीन, उम्र बढ़ना, त्वचा का रंग गहरा होना तथा पर्याप्त समय तक धूप न मिलना विटामिन D की कमी का कारण बन सकता है।
Myth 2: Vitamin D Is Important Only for Bones
Fact:
Vitamin D supports immune function, muscle strength, heart health, mood regulation, and may help reduce the risk of certain infections.
मिथक 2: विटामिन D केवल हड्डियों के लिए जरूरी है।
तथ्य:
विटामिन D प्रतिरक्षा प्रणाली, मांसपेशियों की शक्ति, हृदय स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।
Myth 3: More Vitamin D Supplements Are Always Better
Fact:
Excessive Vitamin D intake can be harmful and may cause high calcium levels, kidney stones, nausea, and kidney damage.
मिथक 3: जितना अधिक विटामिन D लेंगे उतना अच्छा होगा।
तथ्य:
विटामिन D की अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है और इससे शरीर में कैल्शियम बढ़ सकता है, जिससे किडनी स्टोन और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
Myth 4: Only Elderly People Develop Vitamin D Deficiency
Fact:
Vitamin D deficiency can occur at any age, including children, teenagers, adults, pregnant women, and office workers.
मिथक 4: विटामिन D की कमी केवल बुजुर्गों में होती है।
तथ्य:
यह कमी किसी भी उम्र में हो सकती है, विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं, घर या ऑफिस में अधिक समय बिताने वालों में।
Myth 5: Vitamin D Deficiency Always Causes Symptoms
Fact:
Many people have severe Vitamin D deficiency without obvious symptoms. Routine testing may be needed in high-risk individuals.
मिथक 5: विटामिन D की कमी होने पर हमेशा लक्षण दिखाई देते हैं।
तथ्य:
कई लोगों में गंभीर कमी होने के बावजूद कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इसलिए जोखिम वाले व्यक्तियों में समय-समय पर जांच आवश्यक हो सकती है।
Common Symptoms of Vitamin D Deficiency
विटामिन D की कमी के सामान्य लक्षण
✅ Bone pain (हड्डियों में दर्द)
✅ Muscle weakness (मांसपेशियों में कमजोरी)
✅ Fatigue and tiredness (थकान)
✅ Frequent infections (बार-बार संक्रमण)
✅ Back pain (पीठ दर्द)
✅ Mood changes (मूड में बदलाव)
Tips to Maintain Healthy Vitamin D Levels
विटामिन D को सामान्य रखने के उपाय
☀️ Morning sunlight exposure for 15–30 minutes daily
☀️ नियमित सुबह की धूप लें
🥛 Consume Vitamin D-rich foods such as milk, eggs, fish, and fortified foods
🥛 दूध, अंडे, मछली एवं विटामिन D युक्त खाद्य पदार्थ लें
🏃 Stay physically active
🏃 नियमित व्यायाम करें
🩺 Consult your physician before taking supplements
🩺 सप्लीमेंट लेने से पहले चिकित्सक की सलाह लें
Conclusion | निष्कर्ष
Vitamin D is much more than a bone-health vitamin. Understanding the facts can help prevent deficiency and improve overall health.
विटामिन D केवल हड्डियों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। सही जानकारी और समय पर जांच से इसकी कमी को रोका जा सकता है।
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STORY OF A PATIENT
यह कहानी झालावाड़ जिला के पास एक गांव की है जहां पर एक महिला जिसका नाम मीना अपने परिवार के साथ रह रही थी इसका डिलीवरी का टाइम नजदीक ही था पर डॉक्टर को अपनी गरीबी के चलते समय पर नहीं दिखा पाती इसी कारण वह डिलीवरी का टाइम नजदीक होने पर भी अस्पताल नहीं जा सकी वह घर पर ही प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और महिला ने दो सुंदर बच्चों को जन्म दिया इसके बाद दो-तीन घंटे सब कुछ ठीक रहा कि अचानक मरीज को भयंकर रक्त स्त्राव शुरू हो गया मरीज को तुरंत झालावाड़ लाया गया झालावाड़ में कुछ समय के लिए मरीज को भर्ती किया किंतु स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने उसको कोटा रेफर कर दिया मरीज को वह उसके अटेंडेंट को पता था की कंडीशन क्रिटिकल है अतः उसने यह निश्चय किया की उसको कोटा के किसी क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल में भर्ती कराया जाए.
अतः मरीज के परिजन उसको राधा कृष्ण क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल में लेकर आए जहां पर डॉ कमलेश अग्रवाल वह डॉक्टर सुनीता अग्रवाल ने मरीज को देखकर बताया की मरीज की कंडीशन बहुत नाजुक है उसके अत्याधिक रक्त स्त्राव के कारण खून की बहुत कमी हो गई है और मरीज की जान जाने का जोखिम बहुत ज्यादा है यह सभी बात मरीज के परिजनों को समझा कर इलाज शुरू किया किंतु दूसरे दिन जो जांच की रिपोर्ट हाई वह बहुत डरावने वाली थी क्योंकि उसमें एक गंभीर बीमारी जिसका नाम डी आई सी व मल्टी ऑर्गन फेलियर से पीड़ित थी उसके शरीर के लगभग सभी अंगों ने काम करना कम कर दिया था क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉ कमलेश अग्रवाल ने इसको चैलेंज लेते हुए इलाज में कुछ बदलाव कर और अधिक मेहनत से इलाज शुरू किया किंतु मरीज तीसरे दिन गहरी कोमा में चली गई और अब लग रहा था की मरीज का बचना नामुमकिन है डॉ कमलेश अग्रवाल वह मरीज के परिजन काफी परेशान व एवं दुखी थे किंतु फिर भी हिम्मत नहीं हरी थी और कुछ अन्य डॉक्टर से परामर्श लिया और कुछ बदलाव के साथ और इलाज शुरू किया धीरे धीरे लगा की मरीज ठीक हो रहा है और पांचवे दिन मरीज को पूर्णतया होश आ गया अब उसका खून की मात्रा भी नॉर्मल हो चुकी थी पेशाब की मात्रा भी नॉर्मल आ रही थी शरीर में इंफेक्शन की मात्रा भी कम हो चुकी थी सातवें दिन मरीज लगभग पूर्णतया स्वस्थ हो चुका था और उसको राधा कृष्ण क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया मरीज व उसके परिजन बहुत खुश थे की मरीज की जान बच गई उन्होंने डॉ कमलेश अग्रवाल का बहुत-बहुत धन्यवाद व्यक्त किया डॉ कमलेश अग्रवाल भी बहुत खुश हुए की उनकी मेहनत वह भगवान के आशीर्वाद से किसी मरीज की जान बची
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कोटा के निजी अस्पताल मासूम मरीज़ की जान बाची
कोटा के निजी अस्पताल मासूम मरीज़ की जान बाची
दिनांक 25 जून 2020 को राधा कृष्ण क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल में एक मरीज जिसका नाम कशिश भर्ती हुई जिसको साथ में सांस लेने में परेशानी आ रही थी भर्ती करके डॉक्टरों की टीम में भर्ती करके मरीज का इलाज शुरू किया वह कुछ आवश्यक जांच की गई जांच की रिपोर्ट आने पर पता चला की मरीज कशिश के डायाफ्राम में छेद है जिसके कारण एक फेफड़ा पिचक चूका हे आमाशय ने ने डायग्राम के क्षेत्र में से जगह बना कर दाएं साइड के फेफड़े फेफड़े में चला गया और उसने दाएं फेफड़े को पूरी तरह से दबा दिया इसी कारण से मरीज को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था मरीज की कंडीशन धीरे-धीरे बिगड़ती जा रही थी ऐसा लग रहा था की शायद जल्दी इसको सांस लेने की मशीन यानी कि वेंटिलेटर पर रखना पड़ सकता है राधा कृष्ण क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल के चिकित्सक में उसका मैं उसका राधा कृष्ण क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने तुरंत उसका ऑपरेशन करना उचित समझा मरीज के रिश्तेदार को बीमारी की गंभीरता को समझाते हुए उसका
ऑपरेशन शुरू किया ऑपरेशन के दौरान कार चला ऑपरेशन के दौरान पता चला की मरीज के आमाशय में भी छेद है यानी कि आमाशय फटा हुआ है साथ में डायाफ्राम में बहुत बड़े छेदके कारण पूरा अमाशय फेफड़े की तरफ जा चुका है इसी कारण उसको सांस लेने में परेशानी आ रही थी इन सब बीमारियों का तुरंत प्रभाव से से ऑपरेशन किया गया समय रहते सही इलाज मिलने से मरीज की जान बची ऐसा बताया जाता कि इस तरह की बीमारी सामान्यतया जन्मजात विकृतियों में आती है किंतु इस मरीज कशिश के यह बीमारी किसी चोट लगने के कारण पैदा हुई जोकि सामान्यतया एक असामान्य घटना के अंतर्गत आते हैं मरीज के रिश्तेदार ने डॉक्टर व् अस्पताल प्रशाशन का बहुत-बहुत धन्यवाद ज्ञापित किया जिसकी वजह से मरीज की जान बची
राधा कृष्णा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल कोटा ने एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र मे कीर्तिमान स्थापित किया. अस्पताल के चिकित्सको ने हाल ही मे एक 2 साल के बच्चे का सफल ऑपरेशन किया. ये बच्चा कन्जेनाईटल डाईफ्रागमेटिक हर्निया नाम की बीमारी से पीड़ित था ऑपरेशन के दोरान ही पता लगा कि बच्चे के आमाशय (स्टॉमक) में छेद था जो पेट मे ना होकर छाती मे था. अधिकतर बच्चो मे इस बीमारी का पता जन्म पर ही चल जाता है.
ये बीमारी लाखो बच्चों मे से एक मे होती है, डाईफ्रागमेटिक हर्निया के साथ आमाशय मे छेद बहुत ही दुर्लभ है. अधिकतर बच्चे माँ के पेट मे या जन्म के कुछ समय बाद मर जाते हैं.
अस्पताल निदेशक डॉ कमलेश अग्रवाल ने बताया कि बच्चे को ऑपरेशन के बाद वेंटिलेटर पर आई सी यू मे गहन निगरानी मे रखा गया था और अब ये बिल्कुल स्वस्थ है




